उच्च न्यायालय (HC)- नियुक्ति, योगिता, शपथ, कार्यकाल एवं शक्तियां|

इस आर्टिकल में हम उच्च न्यायालय के बारे में जानेंगे। इससे पहले हमने सर्वोच्च न्यायालय के बारे में जाना था जो हमारे भारत का सबसे बड़ा एवं शक्तिशाली न्यायालय है। आपको पता होगा कि भारत में एकीकृत न्यायिक व्यवस्था को अपनाया गया है जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय (Sc) है, उसके नीचे उच्च न्यायालय (HC) है और फिर सबसे नीचे जिला न्यायालय (DC) होते हैं।

तो मुख्यता किस आर्टिकल में हम उच्च न्यायालय के बारे में जानकारी लेंगे और समझेंगे। लेकिन अगर आपने सर्वोच्च न्यायालय के बारे में नही जाना है, तो आप यहां Click here करके जान सकते हैं। क्योंकि जब तक आप सर्वोच्च न्यायालय के बारे में नहीं जानेंगे, तब तक आप उच्च न्यायालय के बारे में अच्छी तरह से नहीं जान पाएंगे।

उच्च न्यायालय

  • इसका वर्णन भारतीय संविधान के भाग 6 में मिलता है।
  • इसके अलावा अनुच्छेद 214 से लेकर अनुच्छेद 231 के बीच में भी इसका वर्णन मिलता है।
  • अनुच्छेद 214 कहता है किभारत के राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था होगी
  • अनुच्छेद 216 के तहत उच्च न्यायालय के गठनका वर्णन मिलता है।
  • अनुच्छेद 231 के तहतदो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय हो सकता है
  • वर्तमान में भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं।
  • आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश का 25वां उच्च न्यायालय की स्थापना की गई है।

न्यायाधीश

  • हमने सर्वोच्च न्यायालय के संबंध में पढ़ा था कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अर्थात जज जो होते हैं उनकी संख्या fix होती है।
  • वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की कुल संख्या 31 है।
  • लेकिन क्या सर्वोच्च न्यायालय के जजों की तरह ही उच्च न्यायालय के जजों की संख्या fix होती है?
  • “नहीं” उच्च न्यायालय के जजों की संख्या Fix नहीं होती है।
  • राज्य के जो उच्च न्यायालय होते हैं, उनके जजों की संख्या डिफरेंट अर्थात अलग-अलग होती है जैसे किसी राज्य में 5,10, 25 जजों की संख्या हो सकती है।
  • उच्च न्यायालय के जजों की संख्या तय करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है।
  • जजों की संख्या निर्भर करती है कि उस राज्य की क्या जनसंख्या है, वहां मुकदमे कितने आते हैं अर्थात जजों पर कितना भार होता है, आदि पर जजों की संख्या राष्ट्रपति द्वारा तय की जाती है।

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नियुक्ति

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति का वर्णन अनुच्छेद 217 में मिलता है।
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • आपने पढ़ा होगा कि सर्वोच्च न्यायालय अर्थात सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति ही करते हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय के जजों की नियुक्ति के संबंध में राष्ट्रपति कॉलेजियम सिस्टम अर्थात न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए न्यायाधीशों की ही सलाह लेते हैं उसके बाद फिर वे जजों की संख्या तय करते हैं।
  • लेकिन जब उच्च न्यायालय के जजों की नियुक्ति की बात आती है तो राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्य के राज्यपाल की सलाह पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं।
  • However जब हाईकोर्ट के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं, तो राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्य के राज्यपाल और साथ में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सलाह लेकर अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।

योग्यता

हाई कोर्ट का न्यायाधीश बनने के क्रम में दो योग्यता होनी चाहिए-

  • भारत का नागरिक हो।
  • 10 वर्ष न्यायाधीश रह चुका हूं या 10 वर्ष तक हाईकोर्ट में वकालत का अनुभव हो।

शपथ

हाईकोर्ट के जजों को शपथ राज्यपाल द्वारा दिलाया जाता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जजों को शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाया जाता है।

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कार्यकाल

  • आपने पढ़ा होगा कि सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक जज रह सकते हैं।
  • लेकिन जब हाईकोर्ट के बारे में बात करते हैं तो अधिकतम 62 वर्ष की आयु तक जज रह सकते हैं।
  • लेकिन न्यायाधीश चाहे, तो बीच में ही त्याग पत्र देकर पद से हट सकते हैं
  • त्यागपत्र सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह ही राष्ट्रपति को दिया जाता है
  • इसके अलावा यदि हाईकोर्ट के न्यायाधीश कुछ ऐसे कार्य करते हैं जो भ्रष्टाचार या असमर्थता से जुड़ा है तो उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
  • पद से हटाने की प्रक्रिया समान उसी प्रकार से होती है जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को पद से हटाया जाता है।

शक्तियां

मूल अधिकारिता

  • हमने सुप्रीम कोर्ट की मूल अधिकारिता में पढ़ा था कि सुप्रीम कोर्ट राज्य एवं केंद्र से संबंधित जितने भी विवाद होते हैं उनको सुप्रीम कोर्ट सुलझाता है लेकिन हाईकोर्ट में मूल अधिकारिता का मतलब होता है कि कुछ ऐसे विवाद जो डायरेक्ट ही सुप्रीम कोर्ट में शुरू किया जा सकता है जैसे- मौलिक अधिकार से जुड़े हुए मुद्दे, विधानमंडल से जुड़े हुए मुद्दे आदि।

रिट अधिकारिता

  • आप आपको पता होगा की जब भी मौलिक अधिकारों का आसान होता है तो अनुच्छेद 3213 के तहत सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट उस पर जांच या संज्ञान ले सकते हैं। पांच प्रकार के रिट जारी करने की शक्ति सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों के पास है।

अपीलीय अधिकार

  • आपको पता होगा कि भारतीय न्यायिक सिस्टम जो है वह एक एकीकृत है इस सिस्टम में कोई भी व्यक्ति डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अपील कर सकता है लेकिन यदि उसे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है तो वह हाई कोर्ट में भी अपील कर सकता लेकिन यदि उसे हाईकोर्ट का भी फैसला मंजूर नहीं है तो वह सुप्रीम कोर्ट में भी अपील कर सकता है और जो कुछ भी सुप्रीम कोर्ट फैसला देगा उसे मानना पड़ता है चाहे ही वह फैसला पक्ष में हो या विपक्ष में।

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