कैसे थे लोग-सिंधु घाटी सभ्यता

यदि हमें सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता के लोगों के बारे में जानना है तो उसके पहले हमें इस सभ्यता के लोगों के जीवन के बारे में जानना होगा। क्योंकि इसके ही आधार पर पता चलेगा कि लोग कैसे थे और उनमें क्या अंतर था।

तो Finally इस आर्टिकल में हम लोगों के सभी प्रकार के जीवन (सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन ) और कैसे थे लोग-सिंधु घाटी सभ्यता में | इसके बारे में पड़ेंगे। इसके बारे में विकिपीडिया ने भी बताया है |

सामाजिक जीवन:

– इस सभ्यता में समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार था | संभवता परिवार मातृसत्तात्मक अर्थात मां ही घर की Head होती थी |

– वर्ण व्यवस्था का संपूर्ण प्रणाम नहीं मिला है परंतु समाज कई वर्गों में विभाजित था पुरोहित,व्यापारी, श्रमिक, शिल्प, आदि।

– इस सभ्यता में लोग शांतिप्रिय थे | Because हमें खुदाई से ओजार तो मिले हैं, पर हथियार नहीं मिला है | साथ ही यह सिंधु  घाटी सभ्यता की एक महत्वपूर्ण विशेषता भी रही है |

– भोजन= शाकाहारी वा मासाहारी दोनों थे |

– मनोरंजन के लिए, लोग पासे, शिकार, पशुओं की लड़ाई, आदि।

राजनीतिक जीवन:

– स्रोत के अभाव अर्थात स्रोत की पूरी जानकारी ना होने के कारण वास्तविक व्यवस्था के बारे में जानकारी नहीं है।

– संभवता: शासन पुरोहित/व्यापारी वर्ग/नगर प्रशासन द्वारा चलाया जाता होगा।

– एक पिग्गट नामक व्यक्ति ने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को सिंधु घाटी सभ्यता की जुड़वा राजधानी कहा है जैसे चंडीगढ, चंडीगढ और हरियाणा की राजधानी है |

– हण्टर नामक एक व्यक्ति ने मोहनजोदड़ो के शासन को राजतंत्रात्मक की जगह जनतंत्रात्मक माना है

आर्थिक जीवन:

– इस सभ्यता के लोग कृषि को भली-भांति जानते थे कैसे जुताई करनी है कैसे सिंचाई करनी है आदि |

– लोग जो मटर, कपास, से परिचित थे | परंतु कुछ फसलों के प्रमाण नहीं मिला है जैसे गन्ना, चावल, रागी, आदि |

– ये लोग पशुपालन भी करते थे इसका प्रिये पशु कूबड वाला सांड था | इसके अलावा गाय, घोड़ा, आदि से भी परिचित थे |

– उद्योग= सूती वस्त्र, बर्तन, शिल्पा, आदि जो मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुआ है |

– व्यापार= पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, इराक, अफगानिस्तान के साथ होता था।

– निर्यात= सूती वस्त्र, हाथी दांत, लकड़ी

– आयात= चांदी, इरान और अफगानिस्तान से लाई जाती थी | टिन, अफगानिस्तान से लाई जाती थी | तांबा,  खेतडा (राजस्थान) से लाई जाती थी | सोना, कर्नाटकासे लाई जाती थी |

धार्मिक जीवन:

– यदि लोगों के धार्मिक जीवन की बात करें तो लोग मातृसत्तात्मक देवी की पूजा करते थे।
( नोट: मातृसत्तात्मक देवी की मूर्ति मोहनजोदड़ो मिली है)

– एक मुहर से प्रमुख देवता पशुपतिनाथ का प्रमाण मिला है

– इसके साथ ही लोग नाग की पूजा, लिंग योनि आदि की पूजा करते थे।

– लोथल (राजस्थान) और कालीबंगा (गुजरात) में वृक्ष और पशु की पूजा का प्रमाण मिला है।

– यहां तक की अग्निकुंड (Fire pit) का भी प्रमाण मिला है।

सिंधु घाटी सभ्यता का पतन:

– इस सभ्यता का पतन लगभग 1800 BC में हो गया था | परंतु इसके पतन के कारण अभी भी बात विवाद होता रहता है |

– एक सिद्धांत यह है कि इंडो-यूरोपियन के लोगों ने सिंधु घाटी सभ्यता पर आक्रमण कर दिया था | जिसके कारण सभ्यता का पतन हो गया|

– सिंधु घाटी सभ्यता के बाद कई ऐसे प्रमाण मिले हैं जिससे यह पता चलता है कि यह सभ्यता केवल आक्रमण के द्वारा एकदम विलुप्त नहीं हुई थी।

– दूसरी तरफ बहुत से पुरातात्विकविद सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का कारण प्रकृतिक को दिया हैं-
1. जलवायु में परिवर्तन के कारण
2. भूकंप के कारण
3. बाढ़ के कारण

 

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