मौर्य वंश के संस्थापक कौन थे – चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार, अशोक और वृहद्रय

मौर्य वंश के संस्थापक कौन थे? चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार, अशोक और वृहद्रय का संबंधइस वंश क्या है इसके संबंध में आज हम इस आर्टिकल में विस्तार में जानेंगे। इससे पहले हमने मगध साम्राज्य के हर्यक वंश, शिशुनाग वंश और नंद वंश के बारे में जानने का प्रयास किया था और आज हम इस वंश से सम्बंधित सभी चीजो के बारे में जानने का प्रयास करेंगे।

मौर्य वंश मगध साम्राज्य का चोथा वंश है। इस वंश का काल 322 BC से 185 BC तक रहा है।इस वंश की स्थापना एक प्रक्रिया के द्वारा हुई थी जिसमें यह कहा जाता है कि चाणक्य जो कोटिल्य के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध रहे हैं। वे नंदवंश के राजा घनानंद के दरबार में रहते थे। घनानंद क्रुरू शासक था। एक दिन उसने चाणक्य का अपमान करके उसे अपने दरबार से भगा देता है।

उसके बाद चाणक्य अपने अपमान का बदला लेने के लिए एक मार्ग की खोजा करता है। मार्ग की तलाश के क्रम में वह चंद्रगुप्त मोर्य से मिला है और उसे राजनीतिक शिक्षा देता है और फिर चंद्रगुप्त मौर्य की सहायता से चाणक्य घनानंद को हराकर मौर्य वंश की स्थापना हैं।

जानकारी के स्रोत

साहित्यिकपुरातात्विक
अर्थशास्त्रअशोक अभिलेख
इंडिकाजूनागढ़ अभिलेख
पुराणसपूत
मुद्राराक्षसगुफा
बोद्ध और जैन ग्रंथभवन

चंद्रगुप्त मौर्य

  • इस वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य थे।
  • ये 322 BC से 298 BC तक राजा बने रहे थे।
  • बोद्ध एवं जैन ग्रंथ में चंद्रगुप्त मौर्य को क्षत्रिय कहा गया है।
  • जबकी मुद्राराक्षस, पुराण आदि में उन्हें शूद्र कहा गया है।
  • जस्टिस और एडूके (यूनानी इतिहासकार) ने चंद्रगुप्त मोर्य को सेन्डरेकोटस कहां है।
  • एप्पियन और प्लूटार्क (यूनानी इतिहासकार) ने चंद्रगुप्त मोर्य को एण्डरोकोटस कहा है।

अन्य बिंदु

  • लगभग 305 BC में सेलयुकस के साथ चंद्रगुप्त मौर्य का एक महत्वपूर्ण युद्ध हुआ था।
  • इस युद्ध में सेलयुकस चंद्रगुप्त मोर्य से हार गया था। इस युद्ध के पश्चात् एक सिंधी हुई थी। इस सिंधी के क्रम में दो तीन बातें हुई थी –
    • मेगारधनीज नामाका एक राजदूत जो पहले सेलयुकस के दरबार में रहता था। वह चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में चला जाता है।
    • चंद्रगुप्त मौर्य, सेलयुकस को 500 हाथी देते हैैं और बदले में सेलयुकस अपने चार क्षेत्र चंद्रगुप्त मौर्य को देता है।
    • सेलयुकस अपनी पुत्री हैलेन की शादी चंद्रगुप्त मौर्य से करवाते हैं।
  • जस्टिन और प्लूटार्क के अनुसार, लगभग 6,00,000 सेना के साथ चंद्रगुप्त मौर्य पूरे भारत को जीत लेता है।
  • चंद्रगुप्त मोर्य जैन धर्म को मानते थे।
  • अंत में भणभाऊ जो उस समय जैन धर्म शाखा के हेड थे।वे जब 298 में क्षवणबैलगोला जाते हैं, तो चंद्रगुप्त भी उनके साथ क्षवणबैलगोला जाते हैं और वहां जाकर चंद्रगुप्त अपने प्राण त्याग देते हैं | प्राण त्यागने की दो विधि थी जिनका नाम संकेयन या संपरा था जिसमें भूखे रहकर प्राण त्यागे जाते हैं।

बिंदुसार

  • ये 298 BC से 273 BC तक राजा बने रहे थे।
  • बिंदुसार को अमित्रघात के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है शत्रु विनाशक।
  • साथ ही जैन ग्रंथों में बिंदुसार को सिंहसेन कहा गया है।
  • एक दिन जब बिंदुसार शासन कर रहे थे तो तक्षशिला में कई बार विद्रोह उभर थे।
  • दो बार प्रमुख विद्रोह हुए थे।
  • उन विद्रोह में राजा की सत्ता को चुनौती देने का प्रयास जा रहा था।
  • इस चुनौती को शांत या खत्म के लिए बिंदुसार ने अपने दो पुत्रों: सुशीम और अशोक को एक के बाद एक करके भेजा था-
    • सबसे पहले उसने सुशीम को भेजा जो विद्रोह को दबाने में पूरी तरह से असफल रहा अर्थात वह विद्रोह को नहीं शांत कर पाया।
    • उसके बाद अशोक को भेजा गया जिसने उस विद्रोह को दबाने में सफल हो गई।

अन्य बिंदु

  • सीरिया के राजा एगियोकस को बिंदुसार ने एक पत्र भेजा था‌। उस पत्र में तीन चीजों की मांग की गई थी-
  1. सुखी अंजीर
  2. अंगूरी शराब
  3. दार्शनिक की मांग
  • एगियोकस ने इनमें से दो चीजों: सुखी अंजीर और अंगूरी शराब को भेजने के लिए मान गया था पर उसने दार्शनिक को नहीं भेजा था।

अशोक

  • ये 269 BC से 232 BC तक राजा बना रहा‌।
  • 269 BC में अशोक राजा बना था और राजा बनने से पहले वह मोर्य साम्राज्य के अवंती राज्य के राज्यपाल के रूप में शासन कर रहा था।
  • मास्की और गुर्जर अभिलेख से अशोक का नाम मिला है।
  • 261 BC में एक घटना घटित हुई थी। इस घटना के संबंध में अशोक अपने शासनकाल के 8वे वर्ष को पूरा करके 9वे वर्ष में प्रवेश कर रहा था।
  • नो वे वर्ष में प्रवेश करते समय वह अपनी सुरक्षा और व्यापार को बढ़ाने के उद्देश्य से कलिंग पर आक्रमण करता है और उसे जीत लेता है।
  • इस युद्ध मे लाखों की संख्या में लोग मार गए थे और लाखों लोग घायल हो गए थे।
  • जब अशोक युद्ध के बाद युद्ध भूमि में पहुंचा तो रोते-बिलखते लोगों को देखकर उसकी आंखें खुल गई और उसनेे उसी समय घोषणा कर दी कि-
    • “आज के बाद मैं युद्ध नहीं करूंगा, बल्कि युद्ध की जगह धम्म नीति को अपनाऊंगा” अर्थात धर्म के मार्ग पर चलूंगा।

अन्य बिंदु

  • इस युद्ध के बारे में अशोक ने अपने 13वे शिलालेख में बताया है कि युद्ध के बाद वह एक उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षुक से मिला हैं और उसी बौद्ध भिक्षुक से उसने धर्म की शिक्षा ली थी और वहां से उसने बौद्ध धर्म को अपना लिया था।
  • बौद्ध धर्म को अपनाने के बाद वह धर्म प्रचार के मार्ग पर निकल पड़ा और बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए उसने कई प्रकार की नीतियों को अपनाया जैसें:-
    • धर्म महामात्रो की नियुक्ति करना
    • विभिन्न शिलालेख का निर्माण करवाना
    • अलग-अलग जगहों पर शिलालेख बनवाना
    • शिलालेख पर अच्छे-अच्छे बातों को लिखवाना ताकि समाज में नैतिकता का प्रचार हो सके।
  • इसके अलावा उसने घूम-घूम कर महामात्रो की मदद से धर्म प्रचार को बढ़ाया।
  • इसके साथ ही वह स्वयं कई धर्म जगहों पर यात्राएं की और अपने शासनकाल में मांसाहारी को बंद करवाने का फैसला किया।
  • इस प्रकार से उसने धर्म को बहुत महत्त्व दिया।

Necessary: बौद्ध धर्म का बहुत अधिक विस्तार अशोक के शासनकाल में देखने को मिलता है।

Very Necessary: मौर्य वंश का अंतिम वंश वृहद्रय था। लगभग 185 BC में वृहद्रय के खुद के सेनापति ने पुष्यमित्र द्वारा हत्या कर दी जाती है और उस हत्या के बाद यह वंश खत्म हो गया था।

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