राज्यसभा – सभापति, संरचना, निर्वाचन, योग्यता

राज्यसभा क्या है? हमारे भारत में राज्यसभा क्या क्या महत्व है? इससे पहले हमने राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, और मंत्री परिषद के बारे में जाना था और आज हम राज्य सभा के बारे में जानकारी एकत्रित करेंगे भारतीय संसदीय व्यवस्था में राज्यसभा को कई नामों से जैसे उच्च सदन, विशेषयज्ञ सदन, और स्थाई सदन के रूप में भी जाना जाता है। जो कि यह संसद का ऊपरी सदन है।

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संरचना

राज्यसभा में 250 सदस्यों का चयन किया गया है जो कि अधिकतम है। इन सदस्यों का विभाजन किया गया है। जिसमें 250 में से 238 सदस्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से लिए जाते हैं और 12 सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा मनोनय किया जाता है। पर 238 सदस्यों में से केवल 233 सदस्य राज्यसभा में आ पाते हैं और 12 सदस्यों में से पूरे 12 सदस्य आते हैं तो इस प्रकार से वर्तमान में राज्य सभा के सदस्यों की संख्या 245 है।

निर्वाचन

हमने अभी ऊपर पड़ा है कि राज्यसभा में जो सदस्य आते हैं वह दो माध्यम से राजसभा मे आते हैं। पहला माध्यम राज्य और केंद्र शासित प्रदेश और दूसरा माध्यमों मनोनय। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्यों को राज्यसभा में भेजने की शक्ति राज्य के विधानसभा के पास होती है अर्थात राज्य के विधानसभा अपने सदस्यों को चुनकर राज्य सभा में भेजते हैं और 12 सदस्य राष्ट्रपति के मनोनय द्वारा राजसभा में आते हैं।

यहां पर एक और बात ध्यान रखने वाली है कि अनुच्छेद 4 में राज सभा के सीटों का आवंटन किया गया है वास्तव में या आवंटन जनसंख्या पर आधारित है ना कि राज्य के क्षेत्रफल और ना ही शिक्षा पर। जिस राज्य की जनसंख्या अधिक होती है उसी हिसाब से सीटों की संख्या दी जाती है अर्थात जिस राज्य की जनसंख्या अधिक होगी उस राज्य को अधिक सीटें दी जाएंगी और जिस राज्य की जनसंख्या कम है उसे कम सीटें दी जाती हैं।

उदाहरण के लिए यूपी को सबसे ज्यादा सीटें दी गई हैं क्योंकि वहां की जनसंख्या सबसे ज्यादा है लेकिन यदि यह क्षेत्रफल पर आधारित होता तो सबसे ज्यादा सीटों की संख्या राजस्थान के पास होती। क्योंकि क्षेत्रफल के अनुसार राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है।

वर्तमान में

परंतु वर्तमान में आप देखोगे तो कुछ राज्यों जैसे बिहार और बंगाल की जनसंख्या अधिक और कम है जिसके कारण वहां सीटों की संख्या मैं भी परिवर्तन है ऐसा इसलिए है क्योंकि यह सारा पैमाना 19 सौ 71 की जनसंख्या पर आधारित है लेकिन यदि हम 2011 की जनगणना से तुलना करें तो हमें कुछ ना कुछ अंतर देखने को जरूर मिलेगा क्योंकि कुछ राज्यों ने जनसंख्या पर अधिक जोर दिया है तो कुछ राज्यों ने कम।

Important news: लेकिन अमेरिका में ऐसा कुछ भी नहीं है। वहां की जो संघीय व्यवस्था है वह जनसंख्या आधारित नहीं है। वहां राज्य हर को दो सीटें दी गई हैं। भले ही वह राज्य कितना ही बड़ा या छोटा क्यों ना हो।

योग्यता

राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए आप में कौन-कौन सी योग्यता होनी चाहिए इसके बारे में नीचे बताया गया है-

  1. भारत का नागरिक हो
  2. 30 वर्ष की आयु होनी चाहिए
  3. किसी लाभ के पद पर ना हो। इसका मतलब है कि वह किसी गवर्नमेंट जॉब में नहीं होना चाहिए
  4. मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए अर्थात किसी भी प्रकार से पागल ना हो।

कार्यकाल

राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है लेकिन इससे पहले भी वह अपने पद से हटने के लिए तैयार पत्र दे सकता है।

चुनाव

यदि हम सदस्यों के चुनाव की बात करें तो प्रति 2 वर्ष पर 1/3 सदस्यों अवकाश (retire) ग्रहण करते हैं।

सभापति

राज्यसभा में एक सभापति होता है जब राज्यसभा की बैठक होती है तो उसमें 245 सदस्यों के साथ एक अध्यक्ष के रूप में काम करने वाले व्यक्ति को सभापति कहते हैं जो सदस्यों से कहता है कि “आप खड़े हो जाऊं, अब आपकी बारी है”।

राज्यसभा में जो सभापति चुने जाते हैं वे हमेशा उपराष्ट्रपति होते हैं उपराष्ट्रपति का मुख्य कार्य सभापति के रूप में ही होता है इसलिए उपराष्ट्रपति को जो वेतन दिया जाता है। वह वास्तव में उपराष्ट्रपति के रूप में काम करने के लिए नहीं दिया जाता है, बल्कि सभापति के रूप में काम करने के लिए मिलता है।

सभापति के साथ एक उपसभापति भी होता है। उपसभापति की जरूरत उस समय होती है जब सभापति राज्यसभा में इसी कारण नहीं आते हैं तो उस स्थिति में उपसभापति कार्य करते हैं।

यहां पर मैं आपको एक और बता दो कि यह एक ऐसा सदन है जिसमें अध्यक्षों की नियुक्ति बाहर से की जाती है। इसके अलावा जो दूसरे सदन होते हैं जैसे विधानसभा उसमें अध्यक्ष की नियुक्ति सदस्यों में से की जाती है। लेकिन राज्यसभा में ऐसा नहीं होता है इसमें अध्यक्ष की नियुक्ति बाहर से की जाती है जिन्हें सभापति कहते हैं जो कि उपराष्ट्रपति होते हैं लेकिन जो उपसभापति होते हैं उनकी नियुक्ति सदस्यों में से ही की जाती है।

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