लोकसभा क्या है? What is the House of the people? in 2020

लोकसभा क्या है? इसमें कैसे सदस्यों का चुनाव किया जाता है और कैसे चुनाव होता है। इसके बारे में आज जानने का प्रयास करेंगे। जैसा कि हमें पता है कि केंद्र स्तर पर संसद होता है और संसद के तीन अंग:- राष्ट्रपति, राज्यसभा, और लोकसभा है‌ राज्यसभा के बारे में हमने पहले ही जान लिया था और आज हम लोकसभा के बारे में जानेंगे।

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इस आर्टिकल के अंत में लोकसभा के संबंध में कुछ ऑब्जेक्टिव दिए गए हैं जिनको आप हल कर सकते हैं।

लोकसभा (House of the people)

लोकसभा को कई नामों से जाना जाता है जैसे:- निम्न सदन, अस्थाई सदन, लोकप्रिय सदन, जनता का सदन।

सदस्यों की संरचना

इसमें हम जानते हैं कि लोकसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम 550+2=552 हो सकती है। जिसमें 550 सदस्य जनता के द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुनकर आते हैं और 2 सदस्य का मनोनय राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है पर यहां बात यह आती है कि यह 2 सदस्य कौन है? इन 2 सदस्य को आंग्ल भारतीय कहां जाता है जिनको मनोनय के द्वारा चुना जाता है। इस अवस्था का वर्णन अनुच्छेद 331 में किया गया है। अब आपके दिमाग में यह सवाल जरूर आता होगा कि क्या वर्तमान में भी सदस्यों की संख्या इतनी ही है?

नहीं, वर्तमान में सदस्यों की संख्या इतनी नहीं है। जो 550 सदस्य की सीटों की संख्या है उसको दो भाग में बांटा गया है पहले भाग में 530 सदस्य राज्य से आएंगे और 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेश से आएंगे। लेकिन राज्य से तो 530 सदस्य आते ही हैं पर केंद्र शासित प्रदेश से केवल 20 में से 13 सदस्य ही आते हैं और दो मनोनय के द्वारा सदस्य आते हैं तो इस प्रकार से वर्तमान में सदस्यों की सीटों की संख्या 545 हैं।

सदस्यों का चयन

  1. प्रत्यक्ष रूप से अर्थात जनता मतदान के द्वारा अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और उन्हें लोकसभा में भेज देते हैं। जबकि हमने राज्यसभा में देखा था कि वहां सदस्यों का चयन राज्यों के विधानसभा द्वारा किया जाता था।
  2. सार्वभौम मताधिकार इसका अर्थ है कि इसमें सार्वजनिक रूप से सभी को जो 18 वर्ष के ऊपर वाले नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार देता है।
  3. फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम

योग्यता

लोकसभा का सदस्य बनने के लिए कौन-कौन सी योग्यता होनी चाहिए इसके बारे में नीचे बताया गया है यदि यह सारी योग्यता आप मैं है तो आप भी लोकसभा का सदस्य बन सकते हैं।

  1. भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. 25+ आयु होनी चाहिए।
  3. किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए अर्थात् किसी भी सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
  4. मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।

कार्यकाल

लोकसभा का आमतौर पर सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। लेकिन हमें राज्यसभा में पड़ा था कि राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। लेकिन यदि वे सरकार में जाकर अपने बहुमत खो देते हैं तो 5 वर्ष के पहले भी उन्हें पद से हटाया जा सकता है। यहां पर आप यह याद कर सकते हैं कि अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति को शक्ति दी गई है कि वे 5 वर्ष के पहले भी इसका विघटन कर सकते हैं और विघटन करने की अनुमति प्रधानमंत्री देते हैं।

कार्यकाल के संबंध में आप याद भी ध्यान रख सकते हैं कि यदि आपातकाल लगा हुआ है, आपको पता है कि तीन प्रकार के आपातकाल होते हैं एक राष्ट्रीय आपात, राष्ट्रीय शासन आपात, द्वितीय आपात। तो 352 के तहत जब राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाता है तो उस समय एक विशेष प्रावधान 83 के तहत दिया गया है कि लोकसभा का कार्यकाल का समय बढ़ाया जा सकता है। यदि आपातकाल लगा हुआ है तो 1 साल के लिए कार्यकाल का समय बढ़ाया जा सकता है और अगर अगले साल भी आपातकाल लगा हुआ है तो भी 1 साल के लिए कार्यकाल का समय बढ़ाया जा सकता है इस प्रकार से काल का समय जितना मर्जी उतना बढ़ाया जा सकता है लेकिन आपातकाल लगा होना चाहिए।

कार्यकाल के संबंध में एक चीज और मैं आपको बता दूं कि 42 संविधान संशोधन 1976 के तहत जब इंदिरा गांधी की सरकार थी तब एक संशोधन इंदिरा गांधी लाई थी जिसमें उन्होंने लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष से 6 वर्ष कर दिया था। और कुछ समय के बाद 44 वे संविधान संशोधन 1978 के तहत दोबारा से लोकसभा का कार्यकाल का समय 6 वर्ष से 5 वर्ष कर दिया गया था।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का लोकसभा में बहुत महत्व है। इनकी नियुक्ति लोकसभा के सदस्यों द्वारा की जाती है अध्यक्ष का मूल कार्य होता है बैठक का संचालन करना और उनकी मदद के लिए उपाध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है। लेकिन जब हमने राज्यसभा को पढ़ा था तो हमने देखा था कि वहां पर एक सभापति होता है जो बाहर से चुनकर आता है लेकिन यहां पर इसका विपरीत है यहां अध्यक्ष की नियुक्ति सदस्यों द्वारा ही की जाती है। भारतीय संविधान के 93 से लेकर 97 तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्ति का वरुण मिलता है।

आरक्षण

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 के तहत लोकसभा में आरक्षण व्यवस्था की गई है अर्थात 84 सीटे अनुसूचित जातियों के लिए रखी जाएंगी और जनजाति के लिए 47 सीटों की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि यह प्रावधान पहले केवल 10 वर्ष के लिए किया गया था धीरे-धीरे संशोधन के माध्यम से 10 वर्ष और अब 2020 तक इसे बढ़ा दिया गया था और आगे किसी फिर संशोधन के द्वारा इसे 2030 तक कर दिया जाएगा। अनुच्छेद 331 के तहत लोकसभा में 2 आंग्ल भारतीय (Anglo Indian) की व्यवस्था की गई है जिनको राष्ट्रपति के द्वारा मनोनय किया जाता है।

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1. संसद के कितने अंग हैं?

 
 
 
 

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3. किस संशोधन के तहत लोकसभा के कार्यकाल 5 से 6 वर्ष कर दिया गया था?

 
 
 
 

4. वर्तमान में लोकसभा के सदस्यों की संख्या कितनी है?

 
 
 
 

5. लोकसभा को किन नामों से जाना जाता है?

 
 
 
 

6. लोकसभा में दो आंग्ल भारतीय कौन चुनता है?

 
 
 
 

7. किस सन में लोकसभा के कार्यकाल 5 से 6 वर्ष कर दिया गया था?

 
 
 
 

8. किस संशोधन के तहत पुनः कार्यकाल को 6 से 5 वर्ष कर दिया गया था?

 
 
 
 

9. किस अनुच्छेद के तहत लोकसभा में दो आंग्ल भारतीय की व्यवस्था की गई है?

 
 
 
 

10. लोकसभा में बैठक का संचालन कौन करता है?

 
 
 
 

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