विधानसभा- सदस्य, कार्यकाल और कार्य एवं शक्तियां

इस आर्टिकल में हम विधानसभा के बारे में जानेंगे कि क्या होता है, इसके कितने सदस्य होते हैं, सदस्यों का विभाजन कैसे होता है, सीटों का विभाजन कैसे होता है, इनका कार्यकाल कितना और इसके पास कौन सी शक्तियां एवं कार्य होते हैं।

सभी प्रकार की बातें जो विधानसभा के संबंध में हैं, उन पर हम चर्चा करेंगे और समझेंगे।

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विधानसभा

  • यह किसी राज्य का निम्न सदन होता है।
  • इसे बहुमत या जनता का सदन भी कहा जाता है। Because यहां जनता का डायट विश्वास बना होता है।
  • यह एक लोकप्रिय सदन होता है Because यहां के जो सदस्य होते हैं वे जनता के द्वारा चुनकर आते हैं।
  • यह अस्थाई होता है अर्थात इसे कभी भी विघटित या भंग किया जा सकता है।
  • तुलनात्मक दृष्टि से जिस प्रकार से केंद्र स्तर पर लोकसभा होता है उसी प्रकाश से राज्य में विधानसभा होता है।
  • अनुच्छेद 168 में विधानसभा का वर्णन हैं।
  • अनुच्छेद 169 में विधानसभा के गठन और अवसाद का वर्णन हैं।
  • अनुच्छेद 170 में विधानसभा के संरचना और गठन संबंधित प्रावधान है।

संरचना

  • आपको पता होगा कि भारत में जितने भी केंद्र स्तर पर सदन हैं। वहां पर ज्यादातर जनसंख्या को आधार बनाया गया है और जनसंख्या को ही आधार बनाकर सीटों की संख्या को तय किया जाता है। same उसी प्रकार से विधानसभा में यह होता है। जनसंख्या को आधार बना के सीटों की संख्या को तय करते हैं।
  • लेकिन क्या सभी राज्यों में विधानसभा की संरचना एक जैसी होती है? “नहीं” because उनका जो आधार तय किया जाता है, वह जनसंख्या पर आधारित होता है। ऐसे में जिन राज्यों की जनसंख्या अधिक है वहां सीटों की संख्या अधिक होगी। लेकिन जिन राज्यों की जनसंख्या कम है वहां सीटों के संख्या कम होगी।

अन्य बिंदु

  • लेकिन क्या यह 2011 की जनगणना पर जनसंख्या आधारित है? “नहीं”1971 की जनगणना से इस चीज को फॉलो किया जा रहा है और आपको पता होगा कि 84 संविधान संशोधन के द्वारा इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया है। इसके अंतर्गत यहां आता है कि 2026 तक सीटों की संख्या fix रहेगी।
  • किसी भी राज्य के विधानसभा में अधिकतम 500 सदस्य हो सकते हैं। उदाहरण के लिए UP में लगभग 403 सीटें हैं। लेकिन न्यूनतम 60 सदस्य हो सकते हैं But इसमें कुछ अपवाद है कि कुछ राज्यों का आकार छोटा होने के कारण वहां के जनसंख्या कम होते हैं। जिसके कारण विधानसभा के सीटों की संख्या 60 से भी कम हो जाती हैं उदाहरण के लिए गोवा में 40, मिजोरम में 40, सिक्किम में 32 सीटें हैं।
  • इस प्रकार से विधानसभा में सीटों की संख्या अलग-अलग होती है।
  • 1971 की जनगणना के आधार पर सीटो की संख्या को फिक्स किया गया था। लेकिन 2011 की जनगणना में देखा गया है कि कुछ राज्यों की जनसंख्या कम हुई है, तो कुछ राज्यों की जनसंख्या बढ़ी भी है But सीटो की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
  • 2026 के बाद ही सीटों की संख्या में परिवर्तन होगा।
  • राज्यों के अलावा दो केंद्र शासित प्रदेश में विधान सभा का गठन किया गया है-
    • दिल्ली में 70 सीटें हैं।
    • पदुचेरी में 30 सीटें हैं।

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चुनाव

विधान सभा के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है? विधान सभा के सदस्यों का चुनाव पूरी तरह से लोकसभा के समान होता है अर्थात पर प्रत्यक्ष रुप से जनता द्वारा इनका चुनाव होता है।

आरक्षण

आरक्षण व्यवस्था के तहत इसमें कुछ विशेष प्रवधान हैं। इसमें आप दो प्रकार के आरक्षण देख सकते हो-

  1. अनुछेद 332 के तहत जिस राज्य में अनुसूचित जाति(SC) जनजाति(ST) कि जितनी संख्या है, उसी के आधार पर आरक्षण की अवस्था है अर्थात जिन राज्यों में SC और ST की संख्या अधिक होगी वहां आरक्षण अधिक होगा, उसी प्रकार से जिन राज्यों में SC और ST की संख्या कम है वहां आरक्षण कम होगा।
    1. अनुच्छेद 332 वह अनुच्छेद है जिसके तहत राज्य में SC और ST के लिए आरक्षण सीट किए जाते हैं।
  1. अनुछेद 333 के तहत राज में एक Anglu Indian अर्थात एक anglu भारतीय मनोनय किया जाता है। जिसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है।

कार्यकाल

  • विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
  • But यह समय fix नहीं होता है इसे 5 वर्ष के पहले भी भगं किया जा सकता है-
    • अनुच्छेद 356 के तहत जब राज्य में राष्ट्रपति शासन आता है तो यह भंग हो जाता है।
    • यदि राज्य में अचानक सरकार का बहुमत खत्म हो जाता है अर्थात जब वे मेजोरिटी में नहीं रह जाते हैं। किसी भी कारण से, तो ऐसे में यह भंग हो जाता है।

योग्यता

यदि कोई व्यक्ति विधानसभा का चुनाव लड़ के विधानसभा का सदस्य बनना चाहता है, तो उस व्यक्ति में कोने-सी योग्यता होनी चाहिए-

भारत का नागरिक होना चाहिए।

25 वर्ष से ज्यादा आयु होनी चाहिए।

किसी भी प्रकार से पागल या दिवालिया घोषणा हो।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष

  • विधान सभा को चलाने के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की जरूरत होती है। अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष कैसे बनते हैं?
  • विधानसभा में जो सदस्य होते हैं उन्ही में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वोटो के द्वारा बनते हैं। विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है इसलिए यह पांच बनते हैं।

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शक्तियां एवं कार्य

  • कोई बिल अर्थात विधायकय प्रस्तावित किया जा सकता है और इसी के माध्यम से वह विधायकय धीरे धीरे पास होता है‌। इसके अंतर्गत इसमें पूरे विधानमंडल की प्रक्रिया शामिल होते हैं।
  • मंत्री परिषद विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
  • यदि धन विधेयक पेश करना है, तो यह धन विधेयक हमेशा विधानसभा में ही पेश होगा और विधान परिषद को इसे पेश करने के लिए 14 दिन की अनुमति दी जाती है‌।

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