सिंधु घाटी सभ्यता – 2020 तक की महत्व जानकारी

सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता के बारे में आपने पहले भी पढ़ा होगा और आप इसके बारे में जानते भी होंगे | यह history का बहुत important विषय है | यदि आप IAS या railwe जैसे exam को देना चाहते है या आप देने जा रहे है तो आप को हर एक topic को understanding के साथ समझना बहुत जरुरी होता है |

क्योंकि ये जो exam होते है वह काफी कठिन होते है और इन exam में पास होने के लिए बहुत understanding की जरूरत होती है | इन्ही सभी चीजो को देखते हुए इसआर्टिकल को बनाया गया है |उम्मीद है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरुर पढेंगेे और समझेंगे | इसके बारे में विकिपीडिया ने भी बताया है |

सिंधु घाटी सभ्यता क्या है ?

वेदिक सभ्यता को पहले भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता माना जाता था लेकिन जब 1921 में इसकी खोज हुई तो यहां पता चला कि यह भारत की सबसे प्राचीन ही नहीं, बल्कि विश्व की महत्वपूर्ण तीन सभ्यता में से एक है जो कि चीन की सभ्यता(चीन), नील की सभ्यता,अफ्रीका), मेसोपतानिया की सभ्यता (इराक) |

इन्हीं में से एक थी यह हमारी सभ्यता | इस प्रकार से यह हमारे भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है और इसकी खोज 1921 में हुई थी |

खोजकर्ता :

 चार्ल्स मेसन-

     चार्ल्स मेसन एक ब्रिटिश काल के व्यक्ति थे | इन्होंने 1826 को हड़प्पा के क्षेत्र ( वर्तमान पाकिस्तान ) में दौरे पर गए थे तो चार्ल्स मेसन को अनुभव हुआ अर्थात उनको लगा कि यहां कोई प्राचीन सभ्यता है |

इसके बारे में उन्होंने एक पत्रिका में इसके बारे में बताया है जिसका नाम है narrative of journey जो धीरे-धीरे करके फेलने लगी थी | परंतु जो जानकारी हमें उन्होंने दी थी वो केवल basic information थी |

( नॉट: चार्ल्स मेसन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में basic information दी थी |)

जेम्स बर्टन और विलियन बर्टन-

लगभग 1856 के आसपास पाकिस्तान के दो क्षेत्र कराची और लाहौर के बीच में एक रेलवे लाइन बना रही थी । इस रेलवे लाइन को बनाने के संबंध में 2 इंजीनियर थे, जेम्स बर्टन  और बिलियन बर्टन  थे, वास्तव में ये दोनों भाई भी थे ।

जब इन्होंने रेलवे लाइन बनाने के लिए खुदाई की तो वहां इन्हें ईटे प्राप्त हुई, तो इन्होंने सोचा कि यहां कोई पुरानी इमारत या भवन रहा होगा और उन्होंने इस पर ज्यादा research भी नहीं किया |

इन्होंने खुदाई से प्राप्त ईटो का उपयोग बड़ी ही आसानी से रेल लाइन की  पटरी के क्रम में Use कर ली । परंतु इन्होंने यह सोचा की यह कोई पुरानी वस्तु का अंग होगा ।

अलेक्जेण्डर कलिंघम 

    अलेक्जेण्डर कलिंघम पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में search करने की कोशिश की,

इन्होंने लगभग 1853-1856 के बीच में कई बार हड़प्पा क्षेत्र के दौरे पर गए और उसके बारे में ओर ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी चाही परंतु यह भी उतने सफल नहीं हो पाए जितनी सफलता की जरुरत थी अर्थात ये पूरी जानकारी प्राप्त नहीं कर पाए, इस सभ्यता के बारे में ।

 जॉन मार्शल

बात करे सर जॉन मार्शल की तो 1921 में  भारत के पुरातात्विक विभाग के हेड थे और इन्हीं की उपस्थिति में सिंधु घाटी सभ्यता की खोज के लिए खुदाई शुरु की गई थी | खुदाई करवाने वाले दो भारतीय व्यक्ति थे पहले व्यक्ति राय बहादुर दयाराम साहनी थे |

जिन्होंने हड़प्पा की खोज की और दुसरे व्यक्ति राखल दास बनर्जी जिन्होंने मोहनजोदड़ो की खोज की थी |इस प्रकार इन दोनों को भी प्राथमिक खोजकर्ता के रूप में भी जाना जाता है| अंत में इस सभ्यता की खोज जॉन मार्शल ने 1921 में की थी |

काल :

Basic रुप से कई किताबों में इसके काल के संबध लिखा होता है कहीं 2500 से लेकर 1700 तक, कहीं 2400 से लेकर 1700 तक, कहीं 2350 से लेकर 1750 तक अलग-अलग काल आपको देखने को मिलेंगे

इसका कारण यह है कि इस सभ्यता के संबंध में जितनी भी जानकारी मिली है वह सब पुरातात्विक स्रोत पर आधारित है किसी भी प्रकार की लिखित जानकारी को अभी तक पढ़ा नहीं गया है |

परिणामस्वरुप जो अलग-अलग खोजकर्ता थे-जैसे सर जॉन मार्शल, d.p. अग्रवाल, चाइल्ड ये सभी ने अपने अपने अनुसार तिथि क्रम रखना शुरु कर दिया

सर जॉन मार्शल = इनकी तिथि कर्म को याद रखना जरुरी है क्योंकि ये पुरातात्विक विभाग के हैड थे | इन्होंने इस सभ्यता का काल 2500 BC-2750 BC तक का बताया है

D.p. अग्रवाल = इनका मानना था कि इस सभ्यता की तिथि 2300-1750 BC तक की सही है और वर्तमान में भी इसी तिथि को सबसे ज्यादा माना जाता है क्योंकि यहां जो तिथि थी वह C-14 पध्दति ( किसी जीवश्म की आयु ज्ञात की जाती है ) पर आधारित थी |

अंत में इसका जो Main काल है वह 2500-1750 BC तक का माना जाता है इसी काल के अंतर्गत हर एक इतिहासकार एक दूसरे से सहमत दिखाई देते है |

नामकरण:

 सिंधु घाटी सभ्यता-

प्रारंभ में जितने भी स्थल खोज जा रहे थे ओ खास तौर पर सिंधु नदी और उस की सहायक नदी के पास खोज जा रहे थे  तो उसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता रखना उचित समझा गया |

 सिंधु सरस्वती सभ्यता-

बाद में चलकर सरस्वती नदी के पास भी इसके स्थल पाए गए और कहा गया कि इसके स्थल सरस्वती नदी के पास भी है

तो उसका नाम सिंध सरस्वती सभ्यता रख दिया गया हालांकि यहां नाम कुछ इतिहासकारों के बीच भी ही प्रचलित रहा और किताबों में इसका Use कम ही किया जाता है |

हड़प्पा सभ्यता-

सबसे चर्चित और सबसे महत्वपूर्ण है, हड़प्पा सभ्यता | हमारे इतिहास में एक कल्चर चला रहा है कि यदि किसी सभ्यता के नामकरण मैं दिक्कत आ आती है तो उस सभ्यता का नाम उस स्थल के नाम पर रखा जाएगा जो स्थल सबसे पहले खोजा गया था |

तो आपको पता होगा कि इस सभ्यता का खोजा गया पहला स्थल हड़प्पा स्थल था | जिस की खोज दयाराम साहनी जी ने की थी जो वर्तमान में पाकिस्तान में है |

( नॉट: इस सभ्यता का Main नाम सिंधु घाटी सभ्यता ही है लेकिन कई बार Question पूछा गया है कि सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता कहना जाता उचित है क्यों ?

Ans : क्योंकि गया पहला स्थल हड़प्पा स्थल था इस कारण इसका नाम हड़प्पा सभ्यता रखना ज्यादा उचित है )

मुख्य विशेषताएं:

नगरीय सभ्यता-

 नगरीय सभ्यता इस सभ्यता की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। क्योंकि यहां एक शहर की तरह थी जैसे शहर में हर चीज की व्यवस्था होती है ऐसी ही व्यवस्था इस सभ्यता में देखी गई है

शांतिप्रिय सभ्यता-

यहां इस सभ्यता की एक और महत्वपूर्ण विशेषता रही है। इस सभ्यता के लोग शांति प्रिय थे अर्थात उनमें लड़ाई झगड़े न के बराबर होते होंगे, क्योंकि जितनी भी इस सभ्यता के बारे में जानकारी मिली है ।

वह सब पुरातत्वविक स्रोत पर आधारित हे अर्थात खुदाई से प्राप्त है और खुदाई से हमें औजार तो मिले हैं पर हतियार नहीं मिले हैं जिससे यह अनुमान लगाया गया है कि इस सभ्यता के लोग शांत वा मिल जुलकर रहते होंगे ।

आद्य-इतिहास सभ्यता-

आद्य-इतिहास सभ्यता इस सभ्यता की एक विशेषता रही है। क्योंकि जितने भी स्रोत मिले हैं वह सब पुरातात्विक स्रोत अर्थात खुदाई से प्राप्त चीजों पर आधारित है |

अभी तक सिंधु लिपि ( सभ्यता से सम्बन्धित छोटे-छोटे संकेतों के समूह को सिन्धु लिपि (Indus script) कहते हैं। इसे सिन्धु-सरस्वती लिपि और हड़प्पा लिपि भी कहते हैं )को पढ़ा नहीं गया है और जब हम इस लिपि को पढ़ लेंगे तो यहां आद्य-इतिहास से इतिहास बन जाएगा।

 कास्मयुगीन सभ्यता-

इसमें तांबा और टिन को मिलाकर कांसा धातु बनाई जाती है जो कि इस सभ्यता में देखे जाने का प्रमाण मिला है।

व्यापार प्रधान सभ्यता-

आंतरिक व्यापार के साथ साथ विदेशी व्यापार भी होता था। पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, इराक और अफगानिस्तान के साथ विदेशी व्यापार होता था।

विस्तृत:

यह सभ्यता बहुत बड़ी थी | लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर इस सभ्यता का विस्तृत था जो लगभग नील की सभ्यता और मेसोपोटामिया की सभ्यता से 12 गुना अधिक बड़ी थी | यहां सभ्यता भारत से लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान फैली हुई है।

स्थल के अनुसार, भारत के उत्तर में जम्मू कश्मीर से लेकर दक्षिण में महाराष्ट्र तक और पश्चिम में यूपी से लेकर और पूर्व मैं पाकिस्तान के बिलूचिस्तान और अफगानिस्तान में इसके स्थल मिले हैं।

दूरी के अनुसार, भारत में जम्मू कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र तक किसकी दूरी 1400 किलोमीटर है और up से लेकर बलूचिस्तान तक इसकी दूरी 1600 किलोमीटर है जैसा कि आप Map में देख सकते हैं।

प्रमुख स्थल:

हम सब जानते हैं सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मिले हैं | पहले हमारे पास इस सभ्यता के संबंध में केवल 40-45 स्थल ही खोजे गए थे। लेकिन वर्तमान में लगभग 1500 स्थल खोजे जा चुके हैं और सबसे ज्यादा स्थल भारत में मिले हैं।

 

  • मांदा (जम्मू कश्मीर )
  • रोपड़, संघोल ( पंजाब )
  • राखीगरी भगवानपुर बनवाली ( हरियाणा )
  • आलमगीरपुर, संगोली, बडगांव ( उत्तर प्रदेश )
  • लोथल धोलावीरा, रंगपुर, भगतराव, सुत्कोटदा ( राजस्थान )
  • दायमाबाद ( महाराष्ट्र )
  • कालीबंगा. बालाथल ( गुजरात )
  • हड़प्पा ( पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त )
  • मोहनजोदड़ो. चंहुदडो. फोटदीजी ( पाकिस्तान के सिंधु प्रान्त )
  • सुत्कागेडोर, डाबरकोट, बालाकोट ( पाकिस्तान के बिलुचिस्तान प्रान्त )
  • शोर्तुगोई, मुन्दीकाज ( अफगानिस्तान )

भारत = 1000 के आसपास स्थल भारत में मिले हैं
पाकिस्तान = 498 के आसपास स्थल पाकिस्तान में मिले हैं
अफगानिस्तान= 2 के आसपास स्थल अफगानिस्तान में मिले हैं

यानि कुल मिलकर 1500 स्थल खोजे जा चुके है |

 

 

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