Ayodhya Ram mandir 2019 -विवाद, इतिहास

Ayodhya Ram mandir विवाद और इतिहास क्या है? नमस्कार! आज हम बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक Ayodhya Ram mandir के बारे में डिस्कस करेंगे| इस टॉपिक को लेकर क्या-क्या विवाद हुए थे और इस विवाद की शुरुआत और इसका फाइनल डिसीजन कब हुआ है सारी इनफार्मेशन आज पता करेंआर्टिकल पढ़ने से पहले एक बात का आप सब जरुर ध्यान रखे आप इस आर्टिकल में केवल इंफॉर्मेशन लेने आए हैं, ना कि एक दुसरे को भुला-भला कहने…

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मेरी आप सब से एक रिक्वेस्ट है कि आप नीचे कमेंट सेक्शन में कोई झगड़े वाली बात नहीं करेंगे साथ ही आप कुछ Ayodhya Ram mandir के सम्बन्ध में Time Line का ध्यान रखना| जिससे आपको इस मुद्दे से रिलेटेड सारी बातें अच्छी तरह समझ में आए|

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Time Line-

  1. 1528 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद Mir Bagi के द्वारा बनाई गई थी जोGeneral of Babar था|
  2. 1949 को अयोध्या में राम जी की एक मूर्ति मिली थी | जिससे यहां पर बहुत बड़ा बवाल हो गया था|
  3. 1992 में मस्जिद को तोड़कर गिरा दिया गया था|

Ayodhya Ram mandir के विवाद की शुरुआत

Ayodhya Ram mandir विवाद की शुरुआत लगभग 1528 में हो गई थी Because इसी समय में Babri Masjid का कंस्पट्हरक्लीशन हुआ था But पहली बार विवाद 1853 को हिंदू मुस्लिम के बीच में होता है| हिंदू कहते कि यह जगह मेरी है और मुस्लिम कहते कि यह जगह मेरी है जिसे कारण यह दोनों आपस में लड़ते हैं| यह समय ब्रिटिश काल था अर्थात अंग्रेज भारत में राज कर रहते हैं|

जब हिंदू और मुस्लिम में विवाद हुआ तो अंग्रेज 1859 मे विवाद को रोकने के लिए दखल अंदाजी करते हैं और यह हिंदू मुस्लिम से कहते हैं कि आप आपस में लड़ो मत, हम थोड़ी जगह हिंदुओं को और थोड़ी जगह मुसलमानों को दे देंगे| हिंदू लोग अपनी पूजा कर सकते हैं और मुसलमान अपनी नमाज पढ़ सकते हैं|

साथ ही अंग्रेजों ने यह अभी कहा की यह जो बाबरी मस्जिद (Time line- 1 को देखो) है| इसके अंदर मुसलमान अपनी नमाज पढ़ेंगे और हिंदू इसके बाहर अपनी पाठ-पूजा करेंगे| चुकि अंग्रेजों का शासन था जिसके कारण अंग्रेजो के खिलाफ कोई जाता नहीं था और इसे कारण हिंदू और मुस्लिम दोनों ने अंग्रेजों की बात मान ली| फिर भी छोटे-मोटे झगड़े हिंदू मुस्लिम के बीच होते रहते थे|

धीरे धीरे टाइम बीतता गया लगभग 1885 में एक Mahat Raghubar Das नामक एक व्यक्ति था| जिसने पहली बार इस मामले को Court तक लेकर जाता है और वह कहता है किमुझे इसके बाहर छत बतानी है हम जब पाठ पूजा करते हैं तो बारिश के कारण हमारी पूजा में दिक्कत आती है फिलहाल इनकी जो मांग थी उसे माना नहीं गया| इनकी मांग कोई झगड़े वाली नहीं थी फिर भी छोटे-मोटे झगड़े होते रहते थे But अंग्रेज उस चीज को कंट्रोल कर लेते थे|Ayodhya Ram mandir 2019  -विवाद, इतिहास

23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में एक राम जी की मूर्ति मिलती है| मूर्ति के मिलने से लोग वहां पर राम जी की पूजा करना शुरू कर देते हैं और हिंदू क्लेम करने लग जाते हैं कि “यह जगह हमारी देखो, हमारे राम जी भी आ गए”और यह बात मुसलमानों को बहुत बुरी लग जाते हैं जिससे हिंदू और मुस्लिम के बीच इतनी खतरनाक लड़ाई होती है की उस जगह को गवर्नमेंट के द्वारा बेन करना पड़ जाता है|

बेन करने के बाद-

पहले तो लोग एक दूसरे पर केश करते थे कि यह जगह मेरी है यहां मैं पाठ पूजा करूंगा, यह जगह मेरी है मैं यहां नमाज पढूंगा अर्थात हिंदू मुस्लिम एक दूसरे पर केस करते थे| लेकिन जब उस जगह को बेन कर दिया गया अर्थात बंद कर दिया जहां हिंदू मुस्लिम पहले एक दूसरे पर केस करते थे| अब उस जगह को खोलने के लिए गवर्नमेंट के ऊपर केस करने लगते हैं|

Case-

Ayodhya Ram mandir के सम्बन्ध में Case के बारे में,

  • 1950 में Mahat Raghubar das के द्वारा फिर से केस किया जाता है| जिसमें वे कहते हैं की “इस बेन को हटाया जाए हमें पाठ पूजा करनी है”
  • 1959 में Nirmohi akhara ‌ द्वारा केस किया जाता है| Nirmohi akhara एक ग्रुप था जो यह चाहता था कि “यह पूरी जगह हिंदू पोजीशन में आना चाहिए अर्थात राम जी के”
  • 1961 में Sunni wagf board द्वारा केस किया जाता है| Sunni wagf board कहते हैं कि “यहां पहले मस्जिद था जिसमे हम नमाज पढ़ते थे इसलिए यह सारी जगह हमारी है और यह जो मूर्ति है वह गलत तरीके से यहां रखी गई” |

इस प्रकार से आपको Ayodhya Ram mandir के संबंध में 3 लगातार केस देखने को मिलेंगे| इसके साथ ही आप को Court के बाहर कुछ कमेटी या ग्रुप बनते दिखेंगे|

कमेटी या ग्रुप

उन केसो के साथ कोट के बाहर कुछ ग्रुप बनने लग जाते हैं जो कोट पर दबाव डालते हैं

Vishwa Hindu Parishad – यह हिंदू के द्वारा बनाया गया ग्रुप होती है| जो यह चाहता था कि “पूरी जगह Hindu को मिनना चाहिए” इस कमेटी के द्वारा कोर्ट पर बहुत दबाव डाला जिससे 1986 को फैजाबाद कोर्ट एक डिसीजन लेता है कि यह जो सारी जगह है वह सब हिंदुओं को दी जाती है हिंदू यहां पर पाठ पूजा कर सकते हैंपर यह बात मुसलमानों को बहुत खराब लग जाते हैं

जिससे मुसलमान Vishwa Hindu Parishad के अगेंस्ट एक कमेटी बनाते हैं जिसका नाम Babri Masjid Committee होता है इस कमेटी की वाही मांग थी जो Vishwa Hindu Parishad की थी|

इन दो केसो के अलावा भी एक कमेटी बनती है जो राम जी को प्रजेंट कर रहा था अर्थात जो राम जी की मूर्ति मिली थी उस मूर्ति से तरफ से एक Committee बनती है जिसका नाम Ram Lalla Virajman होता है | यह Committee चाहता था कि इस पूरी जगह पर राम जी को विराजमान कराना है

इस प्रकार से यदि हम देखें तो Demand बहुत ज्यादा बढ़ जाती हे| हिंदू भी फुल पोजीशन मांग रहे थे और मुस्लिम भी फुल पोजीशन मांग रहे थे| चूंकि दोनों को फुल पोजीशन देना असंभव था और कोर्ट भी हमेशा से यही जाता था कि इस मामले को कोर्ट के बाहर ही निपट जाए | क्योंकि यदि इस मामले का फैसला कोर्ट में होता है तो एक की जीत और दूसरे की हार निश्चित है

जिससे बहुत अधिक बवाल हो सकता है और बवाल हो भी रहा था| साथ ही गवर्नमेंट भी यही चाहता था कि इस मामले को Court के बाहर निपटा दिया जाए इसलिए जो Committee बना रही थी Court उनको भी कह रहा था कि आप आपस में बातचीत करके मामले को सुलझा लो|

Ayodhya Ram mandir 2019  -विवाद, इतिहास

1990 का समय आया, इस समय मामला बहुत ज्यादा खराब हो जाता है क्योंकि इस समय Lal Krishna Advani (लाल कृष्ण आडवाणी) जी ने गुजरात के शामनाथ से up के आयोध्या तक रथयात्रा निकालते हैं इस रथयात्रा निकालने की वजह से बहुत अधिक बवाल मच आता है उस समय up की govt. Kalyan Singh (कल्याण सिंह) जी की थी|

1991 में कल्याण सिंह जी ने देखा कि बवाल बहुत ज्यादा मच रहे हैं, दंगे फसाद हो रहे हैं| इन डांगे फसाद को रोकने के लिए कल्याण सिंह की गवर्नमेंट ने उस “पूरी जगह को अपने कंट्रोल में कर लेते हैं” उसके बाद 6 दिसंबर 1992 मैं बहुत सारे कर सेवकों ने बाबरी माजिद को demolished कर देते हैं जिसके कारण पहले जहां केवल अयोध्या और उसके आसपास के इलाकों में दंगे हो रहे थे अब बाबरी मस्जिद के Demolished होने के कारण पूरे भारत में दंगे होना शुरू हो जाता है|

10 दिसंबर 1992 को एक Liberhar Committee बनाई जाती है इसका Committee का काम होता है कि यह जो दंगे फसाद हो रहे हैं, इन सब पर इंक्वायरी करके और रिपोर्ट Submit करना था | Up में कल्याण सिंह की गवर्नमेंट चल रही थी|और सेंट्रल गवर्नमेंट कोंग्रेस की थी उस समय हमारे PM Narsimha rao थे | पूरे भारत में कंट्रोल कोंग्रेस के हाथ में था| और कोंग्रेस भी देख रही कि सब जगह दंगे फसाद हो रहे हैं तो कांग्रेस एक प्रपोजल रखता है

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प्रपोजल क्या था-

कांग्रेस ने जो प्रपोजल रखा था वह यह था कि इस पूरी जगह पर मंदिर, मस्जिद, लाइब्रेरी, और म्यूजियम बना दिया जाए| हर प्रकार का मनुष्य यहां आया-जाया करेगा| But यह बात लोगों ने नहीं मानी| क्योंकि दंगे फसाद इतने ज्यादा बढ़ गए थे कि हिंदू मुस्लिम एक जगह पर बात करने के लिए तैयार नहीं थे| सारी जगह किसी एक को चाहिए थी|

2002 में bjp गवर्नमेंट सेंटर में आती है अर्थात bjp सेंट्रल गवर्नमेंट के कंट्रोल में आती है और Pm बनते हैं Atal Bihari Vajpayee (अटल बिहारी वाजपेयी) | Pm बनते ही अटल बिहारी भाजपा अयोध्या विभाग नामक एक विभाग बनाते हैं इस विभाग का केवल एक ही काम होता है कि यह जो दंगे फसाद हो रहे हैं उनका सेटलमेंट करो|  हिंदू मुस्लिम दोनों से बात करो और आपस में मामले को सुलझाने की कोशिश करो|

अप्रैल 2002 में अलाहाबाद हाई कोर्ट तीन judes की बेंच बनाता है और वहां पर यह मामला चलता है | अलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले को डील करने से पहले ASI (पुरानी चीजों की knowledge रखने वाले) को बुलाता है और उनसे कहते है कि आप सारी चीजों को देखो, खुदाई करो, पता करो चक्कर क्या है और उसके बाद में Report submit करो|

ASI Report को Submit करता है इस रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1200 के आसपास यहां मंदिर था और ASI रिपोर्ट यह भी कहती है कि लगभग 1500 के आसपास यहां मस्जिद भी था लेकिन 1200 से 1500 के बीच में यहां क्या था|  इसका कोई प्रूफ नहीं मिला है|

पर वहां के लोकल लोगों का कहना है कि पहले यहां पर मंदिर था जिसको तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी| अलाहाबाद हाई कोर्ट यह सब देखते हो गए 10 सितंबर 2010 जजमेंट देता है-

  • जहां पर राम जी की मूर्ति मिली है उस जगह को हम Ram Lalla Virajman Committee को दिया जाता है|
  • सीतारासाई, राम चबूतरा जहां राम जी खेला करते थे उस जगह को हम Nirmohi akhara को दिया जाता है|
  • अब जो 3rd part है वह Sunni wagf board को दिया जाता है|

Supreme Court-

  • 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के डिसीजन को होल्ड पर रख देता है|
  • फरवरी 2016 को सुब्रमंयम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में केस Filed किया कि आप इस केस का फैसला सुनाओ, आप इसे होल्ड पर ना रखो|
  • मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जो Chief Justice KS Kehar हैं वे कहते हैं कि “आप इस मामले को कोट के बाहर ही निपटा लो यदि कोर्ट में फैसला हुआ तो कोई एक हारेगा, फिर दंगे होंगे”|
  • दिसंबर 2017 तक सुप्रीम कोर्ट के पास लगभग 32 अपील पहुंच जाते हैं उन अपील के द्वारा यह कहा जाता है कि “आप इस पर कोई डिसीजन लो”|
  • अब सुप्रीम कोर्ट साफ-साफ कह देता है कि इस मामले पर फैसला 2019 को सुनाया जाएगा| सुप्रीम कोर्ट इस पर डिसीजन लेने के लिए बहुत रिसर्च करता है और अपने अच्छे अच्छे Justices की टीम बनाता है-

Justices की टीम-

  1. Ranjan gogni
  2. sharod arbird bobde
  3. DY chandrachad
  4. ashok bhushar
  5. S. Abdull nazeer

टीम बना लेने के बाद और आपस में Ayodhya Ram mandir पर discuss करके सुप्रीम कोर्ट डिसीजन ले लेता है पर किसी को बताता नहीं है और यह सभी पार्ट्स जो केस को आगे बढ़ा रहे होते हैं उन्हें Moulding of relif submit करने को कहते हैं

Moulding of relif submit का मतलब-

मान के चलो अगर आप जो चीज मांग रहे हो वह आपको नहीं मिलता है या आपके फेवर में नहीं आता तो आप के पास दूसरा ऑप्शन होना चाहिए कि उस चीज के बदले कोई दूसरी चीज दे दी जाए|

केश आगे बढ़ाने वाले-

  • निर्मोही अखाड़ा जिसके वकील सुशील कुमार जैन होते हैं| इनकी डिमांड होती है कि “मुझे पूरा inner possion चाहिए जो पहले मुस्लिम के पास था”|
  • Sunni wagf board जिनके वकील राजीव धवन होते हैं इनकी डिमांड होती है कि “मुझे inner और साथ में जो हमारी मस्जिद टूटी है उसे दुबारा बनवा के दिया जाए”|
  • राम लला विराजमान इसके वकील CS Vaidyanathan इनकी डिमांड होती है कि “मुझे पूरा एरिया चाहिए जो हमे राम जी की है”|

सुप्रीम कोर्ट जजमेंट-

Ayodhya Ram mandir पर S.C का फाइनल डिसीजन-

  • सुप्रीम कोर्ट कहता है कि लोगों के कहने से या ASI रिपोर्ट के आधार पर हमारा डिसीजन नहीं आया है|
  • हमारा डिसीजन केवल असली एविडेंस पर आधारित है जो हमारे सामने हैं|
  • एविडेंस साफ कह रहे हैं कि यहां पर मस्जिद था और सुप्रीम कोर्ट यह भी कहता है कि हिंदू को यहां पूजा करना अलाउड किया जा रहा था जिससे यहां पर दोनों का अधिकार है|
  • सुप्रीम कोर्ट अलाहाबाद हाई कोर्ट के डिसीजन को unsustainable कर देता है क्योंकि अलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमीन को तीन पाठ में विभाजित कर दिया था But पार्ट्स ने तो यह डिमांड ही नहीं किया था|
  • जो Outer Area था जहां पर हिंद पूजा करते थे| 23 दिसंबर 1949 जब बाबरी मस्जिद टुटा नहीं था तब मुस्लिम यह नमाज भी पढ़ते थे. तो इस प्रकार से यदि किसी एक को पूरी जगह दे देते हैं और दुसरे को नहीं देते है, तो उसका Right to worship deprived होगा और भारत में किसी का भी Right to worship deprived नहीं होना चाहिए|
  • इन सभी चीजो को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट फाइनल डिसीजन 9 नवंबर 2019 को सुनाता है ” 2.77 acre की जो लैंड है वह राम लला विराजमान को allotted की जाती है” और “5 acre लैंड waqf board को allotted की जाती है”

“यह सुप्रीम कोर्ट का फाइनल डिसीजन Ayodhya Ram mandir के सम्बन्ध में 9 नवंबर 2019 को सुनाया गया था जिसको हम सभी को मानना है” उम्मीद है कि Ayodhya Ram mandir के सम्बन्ध में सभी important चीजे आपको समझ में आ गया होगा यदि आपको कोई Ayodhya Ram mandir के सम्बन्ध में कोई परेशानी है तो आप मुझ से contact कर सकते है

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