Kisan Bill 2020 kya hai | New Farmer Bill 2020

जैसा कि हम सभी को पता है कि हमारे किसान विरोध कर रहे हैं अपनी बात को मनाने के लिए सरकार पर दबाव डाल रहे हैं जगह जगह पर किसान सड़कों पर उतर आए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन यहां पर आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि Kisan bill 2020 क्या है और यह सब क्यों हो रहा है?

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सरकार ने ऐसा क्या कर दिया है जिससे किसान भड़क उठे हैं ऐसे में मैं आपको बता दूं कि यह सारा मामला तीन अध्यादेश के जारी होने के खिलाफ हो रहा है। जिसके बारे में हम अभी जानेंगे और साथ में यह भी जानेंगे कि अभी तक इस मुद्दे से जुड़े क्या-क्या घटनाएं हो चुकी हैं।

जैसा कि हम सभी को पता है इस समय करोना काल (Covid-19) चल रहा है ऐसे में सभी काम ठप हो चुके हैं लेकिन कुछ काम की छूट दे दी गई है। आपको पता होगा कि जून 2020 में संसद की कार्यवाही नहीं चल रही थी ऐसे में जब संसद की कार्यवाही नहीं चलती है तो सरकार के पास एक विकल्प (option) होता है कि वे “अध्यादेश” जारी कर सकते है।

यदि सरकार को कोई कानून बनाना है वह भी उस समय पर जब संसद नहीं चल रहा होती है तो वह अध्यादेश जारी करता है और आपको पता होगा कि अध्यादेश जारी करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास होती है। यह शक्ति राष्ट्रपति को अनुच्छेद 123 के तहत प्राप्त है, तो इसी शक्ति का प्रयोग करके जून 2020 में भारत के राष्ट्रपति ने कृषि/किसान से जुड़े तीन अध्यादेश/Kisan Bill 2020 जारी किए थे। चलिए तो देखते हैं कि वे 3 अध्यादेश कौन से हैं जिसकी वजह से इतना बवाल हो रहा है।

तीन प्रकार के अध्यादेश कोन से है?

  1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश।
  2. कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवध्र्दन और सरलीकरण) अध्यादेश।
  3. किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश।

ये आप जो ऊपर अध्यादेश देख रहे हैं इसके बारे में हम अभी जानेंगे उससे पहले आपको पता होना चाहिए कि अध्यादेश होता क्या है? उसके बाद हम Kisan bill 2020 के बारे में विस्तार चर्चा करेंगे। चलिए तो देखते हैं कि अध्यादेश क्या होता है?

अध्यादेश क्या होता है?

इसके बारे में आप को जानना जरूरी है क्योंकि यदि आप को अध्यादेश नहीं पता होगा तो आप को इस मुद्दे को नहीं समझ पाएंगे कि यह मुद्दा क्या है और क्यों उसके लिए इतना बवाल हो रहा है।

अध्यादेश की 6 महीने की लिमिट होती है यदि अध्यादेश को जून में लागू किया गया है तो वह केवल दिसंबर तक ही वैध होगा। यदि दिसंबर तक उसे दोनों सभाओं लोकसभा और राज्यसभा से पास करवा लिया जाता है, तो वह कानून बन जाता है। लेकिन यदि उसे पास नहीं करवाया जाता है तो उसे 6 महीने के बाद खत्म कर दिया जाता है।

यहां पर आपको एक और बात याद रखनी है कि राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद 6 सप्ताह के भीतर दोनों सभाओं से प्रस्ताव/अध्यादेश को पारित/पास करवाना जरूरी होता है। लेकिन यदि उसे 6 सप्ताह के भीतर दोनों सभाओं से पास नहीं करवाया जाता है तो उसे भी 6 सप्ताह के भीतर ही समाप्त कर दिया जाता है।

यहां पर इसका मतलब यह है कि यदि संसद 6 महीने तक नहीं चलती है तो वह अध्यादेश 6 महीने तक चलेगा लेकिन यदि संसद बीच में चल जाता है तो जब संसद शुरू हुआ, उस समय से 6 सप्ताह के भीतर उस अध्यादेश को दोनों सभाओं से पास करवाना जरूरी होता है लेकिन यदि उसे पास नहीं करवाया जाता है तो वह 6 सप्ताह के बाद अपने आप खत्म हो जाता है।

उम्मीद है कि आप को अध्यादेश समझ में आ गया होगा हमने अभी ऊपर तीन अध्यादेश के नाम के बारे में जानना था अब उसके बारे में कुछ विशेष जानकारी को देखेंगे

1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश:

इस अध्यादेश यानी Kisan bill 2020 के पहले प्रस्ताव को 15 सितंबर 2020 में लोकसभा से पास करवा लिया गया था और आपको पता होगा कि जब किसी प्रस्ताव या अध्यादेश को लोकसभा से पास करवा लिया जाता है तो वह विधायक बन जाता है, तो इस प्रकार से इसका नाम आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक है पर अभी इसे राज्यसभा से पास नहीं करवाया गया है।

इसके अंतर्गत अनाज दलहन तिलहन खाद्य तेल प्याज आलू इत्यादि को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया है। यहां पर इसका मतलब यह है कि जब कोई वस्तु आवश्यक वस्तुओं की सूची मैं होता है तो सरकार उसे किसानों से खरीद सकता है लेकिन जब उस वस्तु को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया है, तो अब किसान इन्हें सीधा निजी व्यापारियों को बेच सकते हैं। अब सरकार इनको रेगुलेट नहीं करेगा अर्थात जब किसी वस्तु की आवश्यकता होती है, तो सरकार उस पर नियंत्रण रखता है। कि जहां सेवा बस तू बनी है वह सीधा उपभोक्ताओं तक पहुंचे उसकी किसी प्रकार से जमाखोरी/कालाबाजारी ना की जाए।

लेकिन जब किसी वस्तु को आवश्यक वस्तु सूची से हटा दिया जाता है, तो सरकार उस पर नियंत्रण नहीं करता है जिससे वह वस्तु सीधे बाजार नियंत्रण में चली जाती है यहां पर बाजार नियंत्रण का मतलब है कि यदि बाजार में किसी वस्तु का मांग ज्यादा है तो उस वस्तु का मूल्य बढ़ जाएगा लेकिन यदि जिस वस्तु की मांग कम है, तो उसकी मूल कम हो जाएगी। अब यहां पर आपके दिमाग में यह सवाल जरूर आएगा कि इस चीज से हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? अब हम इस चीज को समझते हैं…

कुछ चीजें हमारे जीवन जीने के लिए बहुत जरूरी है जैसे अनाज। अब बाजार में यदि हमारी जरूरतों वाली वस्तु का जमाखोरी/कालाबाजारी होने लगेगा तो वह वस्तु हमें महंगे दाम पर मिलेगी। लेकिन यदि सरकार उस पर नियंत्रण रखती है। तो वस्तु सीधा उपभोक्ताओं तक पहुंच जाती है उसमें किसी प्रकार का कालाबाजारी नहीं होता है। लेकिन अभी हमने ऊपर पढ़ा है कि अनाज को आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया गया है अब इसका अर्थ यह है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा यानी यदि किसान किसी वस्तु को ₹100 में उगाता है

लेकिन बाजार में उसका मूल्य ₹50 है तो किसान को घाटे में जाना पड़ता है। पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर्गत सरकार किसानों को एक मूल्य दे देता है कि इस मूल्य के नीचे आपका वस्तु नहीं खरीदी जाएगी यदि कोई व्यापारी उसे कम दाम में खरीद रहा है तो सरकार उस वस्तु को खुद खरीदेगा है।

किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता ही मिलता है जब वह कोई फसल या वस्तु को तैयार करता है लेकिन यदि इसे आवश्यक वस्तु की सूची से हटा दिया जाए जैसे अनाज, दलहन, तिलहन, आलू, प्याज, को हटा दिया गया जिससे अब इन वस्तुओं का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा। अब सारी चीजें बाजार पर निर्भर करेंगे। किसान अब बाजार में अपनी वस्तु को बेचेगा जिससे उसे लाभ हानि दोनों हो सकती हैं।

2. कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवध्र्दन और सरलीकरण) अध्यादेश:

यह अध्यादेश यानी Kisan bill 2020 के दुसरे प्रस्ताव लोकसभा में विचाराधीन है यानी अभी इस अध्यादेश पर बातचीत हो रही और इसे अभी लोकसभा में पास नहीं किया गया है। इस अध्यादेश के अंतर्गत किसान जिन व्यापारियों को अपनी फसल बेचेंगे उन्हें 3 दिन के अंदर किसानों को पैसा देना पड़ेगा। सरकार ने यह कानून बनाया है है कि यदि कोई व्यापारी किसान से उसकी फसल खरीदा है तो उससे 3 दिन के अंदर उसे पैसे देने होंगे। ऐसा नहीं होगा कि वह किसान को 10 या 20 दिन के बाद पैसा दे।

इसके अलावा किसान अपनी फसल को दूसरे राज्यों में भी बेंच सकता है और साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी फसल को बेच सकता है। इसके साथ ही एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (APMC) का एकाधिकार समाप्त कर दिया गया है। इसके अंतर्गत किसान अपनी फसल को जहां मर्जी वहां पर सकता है उस पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा। पहले क्या होता था कि किसानों को शुल्क देना पड़ता था अब इस अध्यादेश के तहत ऐसा नहीं है किसान जहां मर्जी वहां अपनी फसल को बेच सकता है और यदि बाजार का कोई व्यापारी इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर 10,00,000 का जमाना भी लगाया जा सकता है।

किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश:

यह अध्यादेश यानी Kisan bill 2020 के तीसरे प्रस्ताव को अभी लोकसभा में विचारधीन है। इसे अभी तक लोकसभा से पास नहीं किया गया है। इसके अंतर्गत किसान किसी भी निजी व्यापारी को अपनी फसल बैच सकता है। मंडी में बेचने की कोई जरूरत नहीं है। निजी व्यापारी पैसा ना दे तो उनके लिए भी भारी जुर्माना का प्रावधान किया गया है। यह अध्यादेश इतना जरूरी नहीं है यहां पर केवल दो चीजें याद रख रखने वाली है कि पहला यहां किसानों का आरक्षण किया गया है और दूसरा बाजार का एकाधिकार समाप्त कर दिया गया है।

अब हम समझेंगे कि यहां पर किसानों की क्या नाराजगी है बाजार की क्या नाराजगी है जिससे इतना बवाल हो रहा है। किसान सड़कों पर उतर आए हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। अब इसके बारे में हम जान लेंगे।

किसान की नाराजगी क्या है?

  • किसानों की मुख्य नाराजगी यह है कि अब उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।
  • सरकारी सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।
  • फसल बर्बाद होने पर कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी।
  • पूरी तरह से निजी व्यापारियों की दया पर निर्भर होना पड़ेगा।
  • निजी व्यापारी MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) दिए बिना फसल खरीदने का दबाव बनाएंगे।
  • किसानों और उपभोक्ताओं से ज्यादा जो कंपनियां उस चीज खरीदेंगे उनको ज्यादा लाभ होगा।
  • कंपनीज उस वस्तु का मूल्य/मांग अपने अनुसार तय करेंगे।
  • किसानों का मानना है कि सरकार बड़े व्यापारियों को लाभ पहुंचाना चाहती है।
  • वस्तु का जमाखोरी को बढ़ाना चाहती है।
  • कॉरपोरेट ठेका जेसी खेती को बढ़ाना चाहती है।
  • किसानों का मानना है कि इन सभी चीजों से मंडी व्यवस्था टूटेगी।
  • किसानों को सबसे बड़ा डर यह है कि उनको कंपनियों के अधीन कर दिया जाएगा।

आढ़तियों वा मंडी कारोबारियों की नाराजगी क्या है?

इस अध्यादेश में बिना किसी शुल्क के बाजार में फसल बेची जा सकती है। हमने अभी पढ़ा है कि किसान जहां मर्जी वहां अपनी फसल को बेज सकता है। उसे इसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन जब वह मंडी में बेचता है तो उसे मंडी शुल्क देना होता है। लेकिन वह बार में फ्री में भेज सकता है। तो यहां पर एक बहुत बड़ा प्रश्न उठता है कि यदि किसान बाहर फ्री में अपनी फसल को भेज सकता है तो अब मंडी में क्यों जाएगा? अब आढ़तियों वा मंडी कारोबारियों का कहना है कि मंडी से भी सभी शुल्क हटाया जाए अनाज को मंडी में बेचना निशुल्क कर दिया।

तो किसान और आढ़तियों वा मंडी कारोबारियों एक साथ। इसलिए आपको दो नारे सुनाई देंगे। “किसान बचाओ”, “मंडी बचाओ”।

महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 10 सितंबर 2020 को हरियाणा के गुरुग्राम क्षेत्र के पिपली में किसान इकट्ठा हुए और उन्होंने दिल्ली चंडीगढ़ राजमार्ग को 2 घंटे से अधिक समय तक बंद कर दिया था जिसके चलते उन पर लाठीचार्ज हुआ था और मैं आपको बता दूं या आह्वान भारतीय किसान यूनियन ने किया था लाठी चार्ज होने के बाद जिला प्रशासन ने विश्वास दिलाया दिलाया उसके बाद नाकाबंदी को हटाया गया पर जो यह लाठीचार्ज हुआ था उसके बाद यह सुर्खियों में आ गया है।
  • 17 सितंबर को बीजेपी के गठबंधन में सहयोगी पंजाब के क्षेत्रीय राजनीतिक दल की शिरोमणि अकाली दल की बठिंडा से एमपी रही हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया। यह न्यूज़ भी सुर्खियों में है क्योंकि उन्होंने केवल इसी बात पर इस्तीफा दे दिया कि ये जो संशोधन विधेयक हैं यह किसानों के खिलाफ हैं और शिरोमणि अकाली दल इसका समर्थन नहीं करता है।
  • किसानों ने कहा है कि 20 सितंबर को रास्ता रोको अभियान चलाएंगे। 25 नवंबर को किसान संगठनों के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी बंद का ऐलान कर दिया गया। पंजाब हरियाणा पश्चिमी यूपी झारखंड महाराज पश्चिम बंगाल उड़ीसा तमिलनाडु और दूसरे सभी राज्यों में इसका व्यापक असर दिखेगा।
  • 24 सितंबर से 26 सितंबर तक पंजाब में रेल रोको आंदोलन चलाया जाएगा।

उम्मीद है कि आपको Kisan bill 2020 से जुड़े सभी चीजें समझ में आ गए होंगे। किसानों का मानना है कि यह सारे संशोधन विधेयक को हटा दिया जाए। उनका कहना है कि उनको व्यापारियों के अधीन कर दिया जाएगा। सरकारी सहायता नहीं मिलेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा। और जहां दूसरी तरफ देखे तो आढ़तियों वा मंडी कारोबारियों का कहना है कि यदि आप शुल्क को समाप्त कर रहे हैं तो आप मंडी से भी शुल्क को समाप्त करें।

Kisan Bill 2020 kya hai?

किसान से जुड़े 3 अध्यादेश राष्ट्रपति ने जरी किये थे जिसे Kisan Bill 2020 का नाम दिया गया है

Kisan Bill 2020 के 3 अध्यादेश कोन-से है?

1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश।
2. कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवध्र्दन और सरलीकरण) अध्यादेश।
3. किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश।

Kisan Bill 2020 से किसानो की क्या नाराजगी है?

1. किसानों की मुख्य नाराजगी यह है कि अब उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।
2. सरकारी सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।
3. फसल बर्बाद होने पर कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी।
4. पूरी तरह से निजी व्यापारियों की दया पर निर्भर होना पड़ेगा।
5. निजी व्यापारी MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) दिए बिना फसल खरीदने का दबाव बनाएंगे।

Kisan Bill 2020 से आढ़तियों वा मंडी कारोबारियों की क्या नाराजगी है?

इस अध्यादेश में बिना किसी शुल्क के बाजार में फसल बेची जा सकती है। हमने अभी पढ़ा है कि किसान जहां मर्जी वहां अपनी फसल को बेज सकता है। उसे इसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन जब वह मंडी में बेचता है तो उसे मंडी शुल्क देना होता है लेकिन वह बार में फ्री में भेज सकता है। तो यहां पर एक बहुत बड़ा प्रश्न उठता है कि यदि किसान बाहर फ्री में अपनी फसल को भेज सकता है तो अब मंडी में क्यों जाएगा? अब आढ़तियों वा मंडी कारोबारियों का कहना है कि मंडी से भी सभी शुल्क हटाया जाए अनाज को मंडी में बेचना निशुल्क कर दिया।

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